पुलिस ने मामले में भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 420 (धोखाधड़ी), 406 (आपराधिक न्यासभंग), 467 (जालसाजी), 468 (कूटरचित दस्तावेज तैयार करना), 471 (फर्जी दस्तावेज का उपयोग), 409 (लोकसेवक द्वारा अमानत में खयानत) एवं 34 (समान आशय) के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।
सुशासन तिहार की शिकायत से खुला राज
मामले का खुलासा उस समय हुआ जब सुशासन तिहार 2026 के दौरान किसानों ने शिकायत की कि उन्होंने समिति में ऋण की राशि जमा कर दी थी, लेकिन बैंक रिकॉर्ड में वे अब भी बकायादार दर्ज हैं। शिकायत के बाद गठित जांच दल ने समिति और जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की शाखा नवागढ़ के अभिलेखों की जांच की।
जांच में पाया गया कि कई किसानों से ऋण और हिस्से की राशि लेकर उन्हें रसीदें जारी की गईं, लेकिन राशि का लेखा-जोखा समिति के रिकॉर्ड और बैंक खातों में दर्ज नहीं किया गया। रिपोर्ट के अनुसार पुराने अप्रयुक्त रसीद पुस्तकों और कथित रूप से अवैध तरीके से छपवाई गई रसीदों का उपयोग कर राशि का गबन किया गया।
111 किसानों से वसूली गई रकम पर गबन का आरोप
जांच रिपोर्ट में उल्लेख है कि 111 किसानों से प्राप्त 32.62 लाख रुपये की राशि का रिकॉर्ड में समुचित लेखांकन नहीं किया गया। इसके अलावा किसानों के खातों में समायोजन नहीं की गई राशि और अन्य वित्तीय अनियमितताओं को मिलाकर कुल 57,01,454.40 रुपये के गबन का मामला सामने आया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि समिति के तत्कालीन प्रभारी प्रबंधक राजेन्द्र पाण्डेय और लिपिक अमित साहू ने मिलीभगत कर सहकारी संस्था, किसानों और शासकीय धन को नुकसान पहुंचाया।
बैंकिंग और सहकारी तंत्र पर भी सवाल
इतने बड़े वित्तीय घोटाले के सामने आने के बाद सहकारी विभाग और बैंकिंग निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। किसानों का कहना है कि वर्षों तक यह अनियमितता चलती रही, लेकिन जिम्मेदार तंत्र समय रहते इसे पकड़ नहीं सका।
अब पुलिस जांच पर टिकी निगाहें
नवागढ़ पुलिस द्वारा अपराध दर्ज किए जाने के बाद अब पूरे क्षेत्र की नजर विवेचना पर टिकी हुई है। किसानों और ग्रामीणों को उम्मीद है कि जांच के दौरान घोटाले की पूरी सच्चाई सामने आएगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी।
