कन्या विवाह समारोह और उसके बाद आयोजित समीक्षा बैठक में व्यवस्थाओं को लेकर सामने आई नाराजगी ने पूरे आयोजन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में अब यह चर्चा अब भी जोर पकड़ रही है कि जब मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, मंत्रीगण, विधायक और प्रदेश स्तर के अधिकारी कार्यक्रम में शामिल होने वाले थे, तब जिला प्रशासन ने क्या रोडमैप तैयार किया था?
नोडल अधिकारी कौन था, क्या थी उसकी जिम्मेदारी?
जानकारों का कहना है कि इतने बड़े आयोजन के लिए सामान्यतः एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाता है, जिसके अधीन विभिन्न विभागों के अधिकारियों को जिम्मेदारियां सौंपी जाती हैं। अब सवाल यह उठ रहा है कि इस आयोजन के लिए किस अधिकारी को नोडल बनाया गया था, उसके सहयोग के लिए किन अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई थी और क्या सभी के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित हो पाया था?
यदि सभी व्यवस्थाएं पूर्व निर्धारित थीं तो फिर ऐसी स्थिति क्यों बनी कि कार्यक्रम के दौरान प्रोटोकॉल और बैठक व्यवस्था को लेकर नाराजगी सामने आ गई?
"पीछे से स्वागत" बना चर्चा का विषय
कार्यक्रम के बाद सबसे ज्यादा चर्चा मुख्यमंत्री और अन्य अतिथियों के स्वागत को लेकर हो रही है। राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर स्वागत की प्रक्रिया में ऐसी स्थिति कैसे बनी कि उसे लेकर वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों को आपत्ति जतानी पड़ी। क्या यह महज एक चूक थी या फिर समन्वय की कमी का परिणाम?
छोटे सभाकक्ष में संभाग स्तरीय बैठक पर भी सवाल
बताया जा रहा है कि संभाग स्तरीय समीक्षा बैठक में पांच जिलों के कलेक्टर, विभागीय अधिकारी और जनप्रतिनिधि शामिल थे। इसके बावजूद अपेक्षाकृत छोटे स्थान पर बैठक आयोजित किए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। इतने बड़े स्तर की बैठक के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार नहीं किया गया था?
"खामोश व्यक्ति की खांसी भी खलबली मचा देती है"
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि डॉ. रमन सिंह आमतौर पर संयमित और शांत स्वभाव के नेता माने जाते हैं। ऐसे में यदि उन्होंने सार्वजनिक रूप से नाराजगी जाहिर की है तो इसे सामान्य घटना नहीं माना जा रहा। लोगों के बीच यह चर्चा भी सुनाई दे रही है कि "खामोश व्यक्ति की खांसी भी खलबली मचा देती है, यहां तो डॉक्टर साहब खुद बोल पड़े।"
राजधानी से आए अधिकारी भी चर्चा में
आयोजन में राजधानी से वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी भी रही। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि व्यवस्थाएं मुख्यमंत्री की गरिमा और प्रोटोकॉल के अनुरूप नहीं थीं तो संबंधित अधिकारी क्या कर रहे थे? क्या किसी स्तर पर व्यवस्थाओं की समीक्षा नहीं की गई थी?
अब सबकी निगाहें जवाब पर
हालांकि डॉ. रमन सिंह की नाराजगी के बाद दुर्ग कमिश्नर ने तत्काल मीटिंग लेकर चूक की समीक्षा की किंतु अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि आयोजन की तैयारियों और व्यवस्थाओं को लेकर शासन प्रशासन की ओर से क्या स्पष्टीकरण सामने आता है। फिलहाल पूरे मामले ने जिले की प्रशासनिक कार्यप्रणाली और समन्वय व्यवस्था को बहस के केंद्र में ला दिया है।
