14.56 करोड़ के बैंक घोटाले का मास्टरमाइंड गिरफ्तार : तमिलनाडु से दबोचा गया पूर्व शाखा प्रबंधक, 180 खातों में फर्जीवाड़े का खुलासा

इंडियन ओवरसीज बैंक बेमेतरा में करोड़ों की धोखाधड़ी का मामला, बैंकिंग दस्तावेजों में जालसाजी और नियमों की अनदेखी से सार्वजनिक धन का दुरुपयोग


बेमेतरा टाइम्स । सिटी कोतवाली बेमेतरा पुलिस ने इंडियन ओवरसीज बैंक शाखा बेमेतरा में करीब 14 करोड़ 56 लाख 09 हजार 693 रुपये की बैंक धोखाधड़ी के बहुचर्चित मामले में बड़ी सफलता हासिल करते हुए मुख्य आरोपी एवं तत्कालीन शाखा प्रबंधक विनीत दास को तंजावुर (तमिलनाडु) से गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमांड पर बेमेतरा ले आई है।

यह मामला वर्ष 2022 में तब सामने आया था, जब इंडियन ओवरसीज बैंक शाखा बेमेतरा के शाखा प्रबंधक रज्जू पाटनवार ने क्षेत्रीय कार्यालय रायपुर की आंतरिक जांच रिपोर्ट के आधार पर शिकायत दर्ज कराई थी। जांच में सामने आया कि तत्कालीन शाखा प्रबंधक विनीत दास ने बैंक के नियमों की अनदेखी करते हुए सहयोगियों एवं बिचौलियों के साथ मिलकर करोड़ों रुपये के ऋणों में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं और धोखाधड़ी की।

पुलिस ने इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 409, 120-बी एवं 34 के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की थी। इससे पहले इस प्रकरण में कमलेश सिन्हा, जोहन सिंह वर्मा, नागेश कुमार वर्मा और टीकाराम माथुर को गिरफ्तार किया जा चुका है। मुख्य आरोपी विनीत दास की लगातार तलाश की जा रही थी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस महानिरीक्षक दुर्ग रेंज अभिषेक शांडिल्य के सतत मॉनिटरिंग तथा पुलिस अधीक्षक त्रिलोक बंसल के निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हरीश कुमार यादव एवं एसडीओपी भूषण एक्का के मार्गदर्शन में विशेष टीम गठित की गई। थाना प्रभारी निरीक्षक सोनल ग्वाला के नेतृत्व में पुलिस टीम ने आरोपी का पता लगाकर 29 जुलाई 2026 को तंजावुर (तमिलनाडु) से गिरफ्तार किया।

आंतरिक जांच में चौंकाने वाले खुलासे

बैंक की जांच रिपोर्ट में लगभग 180 ऋण खातों में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ। जांच में पाया गया कि कई मामलों में बिना यूनिट के ऋण स्वीकृत किए गए, फर्जी जीएसटी नंबर वाले सप्लायरों के माध्यम से ऋण वितरित किए गए, ग्राहकों की जानकारी के बिना खातों में राशि का हस्तांतरण किया गया, कृषि एवं मत्स्य ऋणों में पात्रता से अधिक वित्तपोषण किया गया तथा कई मामलों में भूमि, मूल्यांकन रिपोर्ट और कानूनी राय के बिना ही ऋण स्वीकृत कर दिए गए।

जांच में यह भी सामने आया कि बैंक के दिशानिर्देशों की अनदेखी करते हुए बिचौलियों के माध्यम से अंधाधुंध ऋण स्वीकृत किए गए, कई खातों में नकद निकासी और दस्तावेजों में हेरफेर किया गया तथा सरकारी योजनाओं के नाम पर भी नियमों का उल्लंघन किया गया। पुलिस के अनुसार इन सभी कृत्यों से बैंक को 14.56 करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक क्षति हुई।

पुलिस का कहना है कि आरोपी ने बैंकिंग प्रणाली और प्रक्रियाओं का गंभीर उल्लंघन करते हुए अन्य आरोपियों के साथ मिलकर आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और बैंकिंग दस्तावेजों में जालसाजी की।

इस कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक सोनल ग्वाला, उपनिरीक्षक जितेंद्र कश्यप, आरक्षक पुरुषोत्तम कुंभकार सहित सिटी कोतवाली बेमेतरा पुलिस की टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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