इस कार्यक्रम का उद्देश्य हाफ नदी के पुनर्जीवन कार्यों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण, स्थानीय जनसहभागिता एवं प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से गति देना है। प्रशिक्षण में विभिन्न विभागों के अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ एवं मैदानी अमले को जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण, कैचमेंट क्षेत्र विकास, प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण, नदी तट सुरक्षा तथा मृदा एवं जल संरक्षण जैसे विषयों पर विस्तृत जानकारी दी जाएगी।
कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित ट्रांसेक्ट वॉक के दौरान अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ, मैदानी अमला एवं ग्रामीणजन हाफ नदी के विभिन्न हिस्सों का संयुक्त निरीक्षण करेंगे। निरीक्षण में नदी में गाद जमाव, जल प्रवाह में अवरोध, अतिक्रमण, अपशिष्ट प्रबंधन, तट संरक्षण एवं पुनर्जीवन की संभावनाओं का आकलन किया जाएगा। निरीक्षण के आधार पर प्राथमिकता तय कर प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाएगी तथा स्थानीय ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों के सुझाव भी शामिल किए जाएंगे।
ग्राम स्तर पर जनजागरूकता अभियान के माध्यम से नागरिकों को जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, सोक पिट निर्माण, वृक्षारोपण, जल स्रोतों की स्वच्छता तथा प्लास्टिक एवं अन्य अपशिष्ट पदार्थों को नदी-नालों में नहीं डालने के प्रति जागरूक किया जाएगा। साथ ही विशेष श्रमदान, पौधरोपण एवं नदी संरक्षण गतिविधियों में अधिक से अधिक जनभागीदारी सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया जाएगा।
कलेक्टर सुश्री प्रतिष्ठा ममगाई ने जिलेवासियों से अपील करते हुए कहा कि "जल संरक्षण केवल शासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। हाफ नदी जिले की अमूल्य प्राकृतिक धरोहर है, जिसका संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा है।" उन्होंने जनप्रतिनिधियों, युवाओं, महिला स्व-सहायता समूहों, किसानों, विद्यार्थियों, सामाजिक संगठनों एवं आम नागरिकों से अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक नागरिक जल की प्रत्येक बूंद बचाने का संकल्प लेकर वर्षा जल संचयन, वृक्षारोपण एवं जल स्रोतों के संरक्षण जैसे छोटे-छोटे प्रयास करेगा, तो हाफ नदी का पुनर्जीवन संभव होगा और जिले में जल सुरक्षा की मजबूत नींव रखी जा सकेगी। जिला प्रशासन ने सभी नागरिकों से इस महत्वपूर्ण अभियान को जनआंदोलन बनाने में बढ़-चढ़कर सहभागिता निभाने की अपील की है।
