कार्यक्रम के दौरान ड्रोन के जरिए खेतों में उर्वरक छिड़काव का लाइव प्रदर्शन किया गया। कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि पारंपरिक पद्धति की तुलना में ड्रोन से छिड़काव अधिक तेज, सटीक और समान रूप से होता है। इससे उर्वरक की बर्बादी कम होती है, श्रम एवं समय की बचत होती है और किसानों की उत्पादन लागत में उल्लेखनीय कमी आती है।
विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि ड्रोन तकनीक से फसलों की निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकती है। साथ ही किसानों को रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के सीधे संपर्क से बचाव मिलता है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी कम होते हैं।
कार्यक्रम में शामिल कृषक सदस्य विजय पटेल एवं कमल पटेल ने बताया कि वे पिछले पाँच वर्षों से आधुनिक कृषि तकनीकों का उपयोग करते हुए सब्जी, फूल एवं अन्य फसलों की खेती कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सहकारिता, कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के सहयोग से अत्याधुनिक कृषि यंत्रों का लाभ मिल रहा है। ड्रोन के माध्यम से मात्र 7 मिनट में एक एकड़ क्षेत्र में उर्वरक का छिड़काव पूरा हो जाता है, जिससे समय और लागत दोनों में उल्लेखनीय बचत हो रही है। उन्होंने इसे किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी तकनीक बताते हुए कहा कि इससे खेती अधिक लाभदायक और आधुनिक बन रही है।
इस अवसर पर सहायक पंजीयक ए.के. सिंह, वरिष्ठ सहकारी निरीक्षक विनय कुमार जेहोआश, महेंद्र कुमार टेकाम, सहकारिता विस्तार अधिकारी संदीप वर्मा, सहकारी निरीक्षक पल्लवी मेश्राम, रूपिका यादव, कृषि विभाग के आरईओ राजेश वर्मा, मार्केटिंग प्रबंधक संजय ठाकुर, समिति प्रबंधक उत्तरा टंडन, विनोद कुमार साहू, हरीश कुमार साहू, ड्रोन ऑपरेटर लोकेश साहू, पूरन निर्मलकर, मंशा साहू, हरीश वर्मा, प्रिंस राजपूत सहित बड़ी संख्या में किसान एवं विभागीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
सहकारिता विभाग की यह पहल जिले में आधुनिक एवं तकनीक आधारित खेती को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे किसानों को कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त करने के साथ-साथ नई कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए भी प्रोत्साहन मिल रहा है।
