शिकायतकर्ता के अनुसार, करीब 23 माह पूर्व तत्कालीन कलेक्टर रणबीर शर्मा के कार्यकाल में सांसद से की गई शिकायत के आधार पर मामले की जांच के आदेश अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को दिए गए थे। जांच की जिम्मेदारी तत्कालीन तहसीलदार अनिरुद्ध मिश्रा, राजस्व निरीक्षक खुमान देशमुख एवं पटवारी भूपेन्द्र तिवारी को सौंपी गई थी। शिकायतकर्ता का दावा है कि जांच के बाद दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई का आश्वासन भी दिया गया था।
आवेदक ने आरोप लगाया कि जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत होने से पहले संबंधित अधिकारियों के स्थानांतरण हो गए और इसके बाद 9 फरवरी 2026 को ऐसा जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया, जिसे उन्होंने गलत एवं एकतरफा बताया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि प्रतिवेदन में स्थल निरीक्षण, पंचनामा एवं पटवारी प्रतिवेदन जैसी आवश्यक कार्यवाहियों का अभाव है तथा उनके पक्ष को कमजोर करने का प्रयास किया गया है।
पन्ना लाल तिवारी ने कलेक्टर से मांग की है कि पूर्व जांच प्रतिवेदन की पुनः समीक्षा कर नई टीम गठित कर निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि वास्तविक तथ्यों का पता चल सके और दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई हो।
शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन में कहा है कि एक ही शिकायत को लेकर 15 बार कलेक्टर जनदर्शन में पहुंचना अपने आप में प्रशासनिक व्यवस्था के समक्ष गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस बार मामले में निष्पक्ष जांच के आदेश होंगे और उन्हें न्याय मिलेगा।
आवेदन के अंत में शिकायतकर्ता ने लिखा—सत्य को परेशान किया जा सकता है, पराजित नहीं। अब देखना होगा कि 15वीं बार जनदर्शन में पहुंची इस शिकायत पर जिला प्रशासन क्या कार्रवाई करता है।
