खेतों तक पहुंचने का रास्ता बंद, तहसीलदार पर अभद्र व्यवहार का आरोप ;किसानों ने कलेक्टर से लगाई न्याय की गुहार

गुवारा के 11 किसानों का जनदर्शन में आवेदन, खेत तक पहुंच मार्ग बहाल करने और वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध कराने की मांग


बेमेतरा टाइम्स । बेमेतरा जिले के थानखम्हरिया तहसील अंतर्गत ग्राम गुवारा के किसानों ने खेत तक पहुंचने का रास्ता बंद होने से खेती-किसानी प्रभावित होने की शिकायत करते हुए कलेक्टर जनदर्शन में आवेदन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है। किसानों ने आरोप लगाया कि वर्षों से उपयोग में आ रहे मार्ग से डाली गई मिट्टी को तहसीलदार की मौजूदगी में हटवा दिया गया, जिससे खेतों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है।

जनदर्शन में दिए गए आवेदन के अनुसार ग्राम गुवारा के 11 किसानों की निजी कृषि भूमि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र थानखम्हरिया के समीप स्थित है। किसानों का कहना है कि अस्पताल भवन बनने के बाद पिछले लगभग 12 वर्षों से वे अस्पताल के बगल स्थित शासकीय भूमि से होकर अपने खेतों तक आते-जाते रहे हैं। बरसात में रास्ते पर पानी भरने के कारण उन्होंने अपने निजी खर्च से लगभग 30 हजार रुपये की लागत से मिट्टी डलवाकर मार्ग को सुगम बनाया था।

आवेदन में आरोप लगाया गया है कि 16 जुलाई 2026 को तहसीलदार थानखम्हरिया की मौजूदगी में उक्त मिट्टी हटवा दी गई, जिससे खेतों तक पहुंचने का मार्ग फिर से बाधित हो गया। किसानों का कहना है कि जब उन्होंने वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया तो तहसीलदार ने कथित रूप से अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए उनकी बात सुनने से इनकार कर दिया, जिससे वे स्वयं को अपमानित महसूस कर रहे हैं।

किसानों ने यह भी कहा कि संबंधित भूमि उनकी पुश्तैनी कृषि भूमि है और उनके पूर्वज भी वर्षों से इसी मार्ग का उपयोग करते रहे हैं। वर्तमान में रास्ता बंद होने से ट्रैक्टर, कृषि उपकरण और अन्य आवश्यक सामग्री खेतों तक ले जाने में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

फरियादी किसानों ने कलेक्टर से मांग की है कि उनकी कृषि भूमि तक पहुंचने के लिए स्थायी एवं सुगम मार्ग उपलब्ध कराया जाए, ताकि खेती-किसानी का कार्य बिना किसी बाधा के किया जा सके। अब इस मामले में जिला प्रशासन की कार्रवाई पर किसानों की नजरें टिकी हुई हैं।

जनता सम्मान चाहती है, अपमान नहीं

जिले में लगातार ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं कि कुछ अधिकारियों का रवैया आम लोगों के प्रति अभद्र और असंवेदनशील होता जा रहा है। सरकारी कार्यालयों में ग्रामीणों को सम्मान की जगह उपेक्षा और बेवजह इंतजार का सामना करना पड़ता है।

अधिकारी यह न भूलें कि कुर्सी जनता की सेवा के लिए है, रौब दिखाने के लिए नहीं। जनता सम्मान चाहती है, एहसान नहीं। प्रशासन की असली पहचान उसके व्यवहार से होती है, न कि अधिकार से।

वर्सन 

मै गुवारा गई ही नहीं हूँ, मैंने कोई मिट्टी नहीं हटवाई है, आप उन्हें मेरे पास भेजिए !

सरिता मड़रिया, तहसीलदार थानखम्हरिया 

Post a Comment

Previous Post Next Post