ज्ञापन में बताया गया है कि मनहरण विश्वकर्मा लंबे समय से तिरपाल के नीचे जीवन यापन करने को मजबूर हैं। भीषण गर्मी, कड़ाके की ठंड और बारिश जैसे हर मौसम में उनके पास रहने के लिए कोई सुरक्षित एवं पक्का आवास नहीं है। लगभग एक वर्ष पूर्व उनकी माता का निधन हो जाने के बाद वे पूरी तरह अकेले रह रहे हैं और उनका जीवन बेहद कठिन परिस्थितियों में गुजर रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि आवास प्लस 2.0 की सूची में मनहरण विश्वकर्मा का ओवरऑल रैंक 181 तथा कैटेगरी रैंक 135 दर्ज है। इस कारण निकट भविष्य में उनका आवास स्वीकृत होने की संभावना बेहद कम दिखाई दे रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इसी क्रम से स्वीकृति मिलती रही तो उन्हें कई वर्षों तक भी योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा, जबकि पूरे ग्राम पंचायत में उनकी स्थिति सबसे अधिक दयनीय है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि उनका वर्तमान आश्रय किसी भी दृष्टि से रहने योग्य नहीं है। तिरपाल के नीचे गुजर-बसर कर रहे मनहरण की स्थिति इतनी खराब है कि ग्रामीणों ने इसे मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा गंभीर मामला बताया। उनका कहना है कि कई किसानों के मवेशियों के रहने के स्थान भी उनकी झोपड़ी से बेहतर हैं।
ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की है कि संबंधित अधिकारियों से तत्काल स्थल निरीक्षण कराकर वास्तविक स्थिति का सत्यापन कराया जाए तथा मानवीय आधार पर मनहरण विश्वकर्मा को प्रधानमंत्री आवास योजना (आवास प्लस 2.0) में प्रथम प्राथमिकता देते हुए शीघ्र आवास स्वीकृत किया जाए, ताकि वे भी सम्मानपूर्वक और सुरक्षित जीवन जी सकें।
ग्रामीणों ने ज्ञापन के साथ मनहरण विश्वकर्मा के वर्तमान निवास की तस्वीर भी संलग्न कर प्रशासन से शीघ्र संवेदनशील निर्णय लेने की अपील की है।
