संघ का कहना है कि पूर्व में कई बार मांग पत्र, ज्ञापन और आवेदन देने के बावजूद आज तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। इससे संविदा, दैनिक वेतनभोगी, मानदेय और अन्य अनियमित कर्मचारियों में भारी नाराजगी और भविष्य को लेकर असुरक्षा की भावना बढ़ रही है।
ज्ञापन में कहा गया है कि स्वास्थ्य विभाग में लगातार छंटनी, सेवा समाप्ति, वेतन वृद्धि पर रोक, कम वेतन में ओवरटाइम कार्य और कर्मचारियों के शोषण जैसी समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। कई कर्मचारी 10 वर्ष से अधिक समय से कार्यरत हैं, लेकिन आज भी उन्हें वही वेतन मिल रहा है और नियमितीकरण को लेकर कोई निर्णय नहीं हुआ है। इसका असर कर्मचारियों के मनोबल के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ रहा है।
संघ की प्रमुख मांगें
स्वास्थ्य विभाग में निजीकरण, आउटसोर्सिंग एवं ठेका प्रथा को समाप्त किया जाए।
एनएचएम, जीवन दीप समिति, डीएमएफ, स्वशासी एवं अन्य मदों में 5 से 10 वर्ष या उससे अधिक समय से कार्यरत संविदा, दैनिक वेतनभोगी, मानदेय एवं अन्य अनियमित कर्मचारियों को रिक्त पदों पर समायोजित कर नियमित एवं स्थायी किया जाए।
जीवन दीप समिति सहित अन्य योजनाओं के कर्मचारियों को "समान काम, समान वेतन" के सिद्धांत के अनुसार श्रम अधिनियम एवं जिला कलेक्टर द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन का लाभ दिया जाए।
संघ ने चेतावनी दी कि यदि सरकार जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है, तो कर्मचारियों में असंतोष और बढ़ेगा। साथ ही स्वास्थ्य विभाग को पूरी तरह निजीकरण और ठेका प्रथा से मुक्त कर कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने की मांग दोहराई गई।
