जिला अस्पताल से निजी अस्पताल तक 'कमीशन' का खेल ? मरीजों को एंबुलेंस से निजी अस्पताल भेजने का वीडियो, ड्यूटी डॉक्टर की भूमिका पर भी उठे सवाल

डॉक्टर नहीं होने का हवाला देकर निजी अस्पताल भेजने का आरोप, वार्ड बॉय ने बुलवाई निजी एंबुलेंस, अब ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर की जवाबदेही पर भी सवाल।



बेमेतरा टाइम्स । जिला चिकित्सालय बेमेतरा एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। आरोप है कि अस्पताल में भर्ती मरीजों को डॉक्टर उपलब्ध नहीं होने का हवाला देकर निजी अस्पतालों में भेजा जा रहा है। इस पूरे मामले में ड्यूटी पर मौजूद वार्ड बॉय की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि मरीजों को गुमराह कर निजी अस्पताल की एंबुलेंस बुलवाई जाती है और उन्हें वहां भर्ती कराया जाता है।

बेमेतरा टाइम्स के संवाददाता द्वारा मौके पर बनाया गया वीडियो इस पूरे घटनाक्रम पर कई गंभीर सवाल खड़े करता है। वीडियो में कथित रूप से एक निजी अस्पताल की एंबुलेंस जिला चिकित्सालय परिसर में पहुंचकर मरीज को अपने साथ ले जाती दिखाई दे रही है।

जानकारी के अनुसार कल मंगलवार को ग्राम पाहन्दा के कुछ ग्रामीण किसी कार्य से सरदा गए थे। वापस लौटते समय देवरी के पास उनका ऑटो अनियंत्रित होकर पलट गया, जिससे पांच लोगों में से दो गंभीर रूप से घायल हो गए। प्राथमिक उपचार के लिए उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सरदा ले जाया गया, जहां से हालत गंभीर होने पर जिला चिकित्सालय बेमेतरा रेफर कर दिया गया।

मरीज के परिजनों का आरोप है कि जिला अस्पताल पहुंचने के बाद उन्हें बताया गया कि संबंधित डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं। इसके बाद मौजूद वार्ड बॉय ने कथित रूप से निजी अस्पताल जाने की सलाह दी और वहीं से फोन कर निजी अस्पताल की एंबुलेंस बुलवाई, जिसके माध्यम से शाम लगभग 6 बजे मरीजों को बेमेतरा के एक निजी अस्पताल भेज दिया गया।

ड्यूटी डॉक्टर की भूमिका पर भी उठे सवाल

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल उस समय ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर को लेकर भी खड़ा हो रहा है। आखिर जिस समय मरीज जिला अस्पताल पहुंचे, उस समय किस डॉक्टर की ड्यूटी लगी हुई थी? यदि डॉक्टर ड्यूटी पर थे तो मरीजों का परीक्षण क्यों नहीं किया गया? यदि डॉक्टर अनुपस्थित थे तो उनकी अनुपस्थिति का कारण क्या था? और यदि बिना उचित चिकित्सकीय परीक्षण के मरीजों को निजी अस्पताल भेजा गया, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी?

यदि जांच में यह सामने आता है कि ड्यूटी के दौरान लापरवाही बरती गई या मरीजों को अनावश्यक रूप से निजी अस्पताल भेजा गया, तो संबंधित डॉक्टर, वार्ड बॉय एवं अन्य जिम्मेदार कर्मचारियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की जाएगी, यह भी एक अहम प्रश्न है।

सूत्रों के अनुसार, यह कोई एक दिन की घटना नहीं बल्कि लंबे समय से चल रही कथित व्यवस्था का हिस्सा है। आरोप है कि मरीजों को डॉक्टर, सर्जन या विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं होने का बहाना बनाकर निजी अस्पतालों में भेजा जाता है और इसके बदले कमीशन का खेल चलता है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

यदि इन आरोपों में सच्चाई है, तो यह न केवल सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न है, बल्कि गरीब मरीजों के इलाज के अधिकार से भी जुड़ा गंभीर मामला है। अब देखना होगा कि कलेक्टर, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) और जिला प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई करते हैं।

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वर्सन 

मामले पर सिविल सर्जन को तत्काल नोटिस जारी किया जाएगा, जांच के बाद दोषियों पर कार्यवाही की जाएगी !

अमृतलाल रोहलेडकर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी बेमेतरा 


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