धरना-प्रदर्शन के बाद कोटवारों ने मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपते हुए अपनी वर्षों पुरानी मांगों को शीघ्र पूरा करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि कोटवार लंबे समय से शासन-प्रशासन की जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं, लेकिन उन्हें न तो नियमित किया गया है और न ही सम्मानजनक पारिश्रमिक दिया जा रहा है।
कोटवारों ने मांग की कि उन्हें नियमित कर राजस्व विभाग में संविलियन किया जाए, मासिक पारिश्रमिक बढ़ाकर न्यूनतम 15 हजार रुपये किया जाए, नियुक्तियों में हो रहे भ्रष्टाचार पर रोक लगाई जाए, बिना तथ्यात्मक जांच के कार्रवाई बंद की जाए, बेगारी पर रोक लगाने संबंधी आदेशों का कड़ाई से पालन कराया जाए तथा नगर पालिका एवं नगर निगम क्षेत्रों में कोटवारों की नियुक्ति पर लगाया गया प्रतिबंध हटाया जाए।
आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आगामी दिनों में आंदोलन को और व्यापक एवं उग्र रूप दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। धरना-प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में कोटवार उपस्थित रहे।
