कोटवारों ने मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन, नियमितीकरण से लेकर वेतन वृद्धि तक उठाईं कई अहम मांगें


बेमेतरा टाइम्स । कोटवार एशोसिएशन ऑफ छत्तीसगढ़, जिला बेमेतरा के नेतृत्व में कोटवारों ने अपनी लंबित एवं ज्वलंत समस्याओं के निराकरण की मांग को लेकर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया कि प्रदेश के कोटवार वर्षों से शासन-प्रशासन एवं आम जनता की सेवा कर रहे हैं, लेकिन आज तक उन्हें नियमित कर्मचारी का दर्जा नहीं मिल सका है।

जिलाध्यक्ष सम्पतदास मानिकपुरी ने बताया कि अंग्रेजों के शासनकाल से पीढ़ी-दर-पीढ़ी कोटवार राजस्व विभाग के महत्वपूर्ण कार्यों का निर्वहन कर रहे हैं, लेकिन आज भी उन्हें नाममात्र का पारिश्रमिक मिलता है। सेवा निवृत्ति, मृत्यु या त्यागपत्र की स्थिति में पेंशन एवं ग्रेच्युटी जैसी सुविधाएं नहीं मिलने से कोटवारों और उनके परिवारों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

ज्ञापन में हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय के उस निर्णय का भी उल्लेख किया गया, जिसमें लंबे समय से अस्थायी रूप से कार्यरत कर्मचारियों को नियमित करने की बात कही गई है। इसी आधार पर कोटवारों को भी नियमित कर राजस्व विभाग में संविलियन करने की मांग की गई।

संघ ने वर्तमान पारिश्रमिक को महंगाई के अनुपात में बेहद कम बताते हुए सभी श्रेणियों के कोटवारों का मानदेय बढ़ाने की मांग रखी। ए श्रेणी के कोटवारों का मानदेय 6 हजार से बढ़ाकर 15 हजार, बी श्रेणी का 5,500 से 12 हजार, सी श्रेणी का 4,500 से 10 हजार तथा डी श्रेणी का 3 हजार से बढ़ाकर 8 हजार रुपये प्रतिमाह किए जाने की मांग की गई।

ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि कोटवारों की नियुक्ति में परिवार के सदस्यों को प्राथमिकता देने का प्रावधान होने के बावजूद कई स्थानों पर नियमों की अनदेखी कर अन्य लोगों की नियुक्ति की जा रही है। संघ ने नियुक्ति प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार पर रोक लगाने और दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की।

इसके अलावा कोटवारों से मूल दायित्वों के अलावा अन्य कार्य कराए जाने, बेगारी लेने, बिना जांच एवं पक्ष सुने निलंबन या पदमुक्त करने जैसी शिकायतों का भी उल्लेख किया गया। संघ ने शासन के निर्देशों का कड़ाई से पालन कराने, कोटवारों का शोषण रोकने तथा किसी भी कार्रवाई से पहले निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग की।

ज्ञापन में नगर पालिका एवं नगर निगम क्षेत्रों में कोटवारों की नियुक्ति पर लगे प्रतिबंध को हटाने की मांग भी शामिल है। अंत में संघ ने मुख्यमंत्री से सभी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेकर कोटवारों के हित में शीघ्र शासनादेश जारी करने की अपील की।

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