व्यवस्थित प्रबंधन, पारदर्शी आय-व्यय और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में उठ रही सकारात्मक पहल
चर्चा के केंद्र में मां भद्रकाली मंदिर (बेमेतरा), बुचीपुर महामाया मंदिर, सिद्धि मंदिर संडी, कारोकन्या मंदिर (लिमाही चौक के पास) तथा हनुमान मंदिर (थानखम्हरिया) जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल हैं। समाजजनों का कहना है कि इन मंदिरों में विधिवत शासकीय न्यास गठित होने से नियमानुसार 21 सदस्यीय ट्रस्ट का गठन होगा, जो मंदिर की आय-व्यय, विकास कार्यों और धार्मिक गतिविधियों के संचालन में पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा। ऐसे ट्रस्टों की निगरानी संबंधित अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) के माध्यम से की जाती है।
उदाहरण के रूप में चंडी मंदिर, नेवनारा का उल्लेख किया जा रहा है, जहां वर्ष 2006 से शासकीय न्यास संचालित है। यहां प्रत्येक चार वर्ष में 21 सदस्यीय कार्यकारिणी का गठन किया जाता है तथा आय-व्यय का नियमित लेखा-जोखा प्रस्तुत किया जाता है। इसका प्रशासनिक दायित्व संबंधित एसडीएम कार्यालय के माध्यम से संचालित होता है।
धार्मिक एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों का यह भी मानना है कि यदि जिले के प्रमुख मंदिरों को शासकीय न्यास के साथ-साथ पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए, तो संस्कृति विभाग के माध्यम से धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों को बढ़ावा मिल सकेगा। इससे स्थानीय पर्यटन, रोजगार और क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को भी नई दिशा मिलने की संभावना है।
इसी विषय को लेकर सर्व ब्राह्मण समाज बेमेतरा के जिला अध्यक्ष डॉ. शिरीष शर्मा, प्रदेश सचिव विकासधर दीवान सहित समाज के अनेक पदाधिकारी एवं सदस्य इस मुद्दे पर आपसी चर्चा कर रहे हैं। समाजजनों का कहना है कि शीघ्र ही इस संबंध में प्रशासन के समक्ष औपचारिक रूप से अपनी बात रखी जाएगी, ताकि जिले के प्रमुख धार्मिक स्थलों के समग्र विकास की दिशा में आवश्यक पहल हो सके।
