पहले भी 5 बार रहा अनधिकृत अनुपस्थित, कई विभागीय सजाओं के बाद हुई बड़ी कार्रवाई
जानकारी के अनुसार आरक्षक विवेक पोद्दार की ड्यूटी 03 जून 2025 को बंदी पेशी के लिए लगाई गई थी, लेकिन वह उसी दिन से बिना सक्षम अनुमति अथवा विभाग को नियमानुसार सूचना दिए अनुपस्थित हो गया। वह 03 जून 2025 से 18 अगस्त 2025 तक लगातार 77 दिनों तक ड्यूटी पर उपस्थित नहीं हुआ। इस दौरान विभाग द्वारा कई बार नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया तथा ड्यूटी पर लौटने के निर्देश दिए गए, लेकिन उसने समय पर उपस्थित होकर संतोषजनक जवाब नहीं दिया। विभागीय जांच में उसे अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया गया, फिर भी आरोप प्रमाणित पाए गए।
जांच के दौरान आरक्षक का पूर्व सेवा रिकॉर्ड भी असंतोषजनक पाया गया। सेवा अभिलेखों के अनुसार उसे पहले तीन छोटी एवं एक बड़ी विभागीय सजा दी जा चुकी थी। अंतिम अवसर देते हुए वेतन वृद्धि रोकने जैसी कठोर सजा भी दी गई थी, लेकिन उसके आचरण में कोई सुधार नहीं आया। सेवाकाल के दौरान वह पांच बार अनधिकृत रूप से अनुपस्थित रह चुका है।
विभागीय अभिलेखों में यह भी उल्लेख है कि आरक्षक के विरुद्ध दो आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं तथा एक अन्य विभागीय जांच जिला दुर्ग में लंबित है। हालांकि इन मामलों का वर्तमान प्रकरण से सीधा संबंध नहीं है, फिर भी विभाग ने इसे उसके लगातार अनुशासनहीन आचरण का संकेत माना। जांच में यह निष्कर्ष निकाला गया कि आरक्षक विभागीय सेवा के प्रति गंभीर नहीं है और भविष्य में उसके एक अनुशासित पुलिसकर्मी के रूप में कार्य करने की संभावना अत्यंत कम है।
पुलिस अधीक्षक त्रिलोक बंसल (IPS) ने 77 दिनों की अनुपस्थिति अवधि को 'कार्य नहीं, वेतन नहीं' के सिद्धांत के तहत अवैतनिक घोषित किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस विभाग में अनुशासनहीनता किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी और भविष्य में भी ऐसे मामलों में नियमानुसार कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।
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