प्रार्थी के अनुसार, विभागीय रिकॉर्ड में उनकी 95 वर्षीय माता श्रीमती कुन्ती बाई को मृत दर्शा दिया गया, जबकि वे पूरी तरह जीवित हैं। इसी आधार पर पूरे परिवार का राशन कार्ड निरस्त कर दिया गया, जिससे परिवार को उचित मूल्य की दुकान से मिलने वाला राशन बंद हो गया है।
सुखेराम राजपूत ने आवेदन के साथ अपनी माता का आधार कार्ड, ग्राम पार्षद द्वारा जारी जीवित होने का प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया है। उन्होंने यह भी बताया कि वे अपनी माता को स्वयं कार्यालय लेकर पहुंचे, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वे जीवित हैं और रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी पूरी तरह गलत है।
आवेदन में उन्होंने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर खाद्य विभाग के रिकॉर्ड में तत्काल सुधार किया जाए, श्रीमती कुन्ती बाई का नाम जीवित सदस्यों की सूची में पुनः जोड़ा जाए तथा निरस्त राशन कार्ड को शीघ्र बहाल किया जाए, ताकि परिवार को पुनः राशन का लाभ मिल सके।
अब यह मामला प्रशासनिक कार्यप्रणाली और विभागीय सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर रहा है। यदि आवेदन में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल एक गंभीर तकनीकी त्रुटि बल्कि पात्र हितग्राहियों के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला मामला भी माना जाएगा।
वर्सन
हो सकता है केवाईसी को लेकर त्रुटि हुई होगी, किंतु अब हितग्राही का राशन कार्ड सक्रिय हो चुका है, हितग्राही विभाग से संपर्क कर अधिक जानकारी ले सकते हैं !
ओमकार सिंह ठाकुर, जिला खाद्य अधिकारी बेमेतरा
