दो घंटे इंतजार... दो मिनट की प्रेस वार्ता ! क्या सिर्फ औपचारिकता निभाने बेमेतरा पहुंचे थे उप मुख्यमंत्री ? पत्रकारों में प्रेस वार्ता को लेकर नाराजगी


बेमेतरा टाइम्स । लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहे जाने वाले मीडिया को शासन और जनता के बीच सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है। लेकिन जब मीडिया को घंटों इंतजार कराने के बाद केवल औपचारिक प्रेस वार्ता कर रवाना हो जाया जाए, तो कई सवाल खड़े होना स्वाभाविक हैं।

शुक्रवार को उप मुख्यमंत्री अरुण साव के बेमेतरा प्रवास के दौरान जिला जनसंपर्क कार्यालय ने सभी प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया प्रतिनिधियों को शाम 4:00 बजे कलेक्टरेट परिसर स्थित एसबीआई एटीएम के पास मीडिया ब्रीफिंग के लिए आमंत्रित किया था। निर्धारित समय पर पत्रकार पहुंच गए और उप मुख्यमंत्री के आने का इंतजार करते रहे। लेकिन मीडिया ब्रीफिंग शाम 6:00 बजे के बाद शुरू हो सकी।

लंबे इंतजार के बाद हुई प्रेस वार्ता कुछ ही मिनटों में समाप्त हो गई। पत्रकारों का कहना था कि जिले से जुड़े कई महत्वपूर्ण और जनहित के मुद्दों पर प्रश्न पूछने का अवसर ही नहीं मिला, और न ही प्रमुख सवालों के संतोषजनक जवाब दिए गए। इससे मीडिया प्रतिनिधियों में नाराजगी साफ दिखाई दी।

पत्रकारों का कहना है कि यदि पहले से प्रेस वार्ता का समय निर्धारित किया जाता है, तो उसका पालन भी होना चाहिए। यदि किसी कारणवश देरी हो, तो इसकी जानकारी मीडिया को समय पर दी जानी चाहिए। मीडिया प्रतिनिधि भी अपने अन्य समाचार और दायित्व छोड़कर निर्धारित समय पर पहुंचते हैं। ऐसे में उनके समय और पेशेवर दायित्वों का सम्मान किया जाना आवश्यक है।

मीडिया का मानना है कि प्रेस वार्ता केवल औपचारिकता निभाने का माध्यम नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह शासन और पत्रकारों के बीच खुला संवाद होना चाहिए, जहां जनसरोकार से जुड़े सवालों के स्पष्ट और तथ्यात्मक जवाब मिल सकें। लोकतंत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता तभी मजबूत होगी, जब जनप्रतिनिधि मीडिया के प्रश्नों का खुलकर सामना करेंगे।

अब सवाल यह है कि यदि पत्रकारों को घंटों इंतजार कराने के बाद उनके महत्वपूर्ण सवालों का जवाब देने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया जाता, तो ऐसी प्रेस वार्ता का वास्तविक उद्देश्य क्या रह जाता है? यह प्रश्न केवल बेमेतरा के पत्रकारों का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संवाद की गरिमा से भी जुड़ा हुआ है।

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