बताया गया कि वार्ड में लो-वोल्टेज की समस्या को लेकर पार्षद और वार्डवासियों की ओर से लगातार बिजली विभाग को शिकायतें एवं आवेदन दिए जा रहे थे। इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। आखिरकार पार्षद नीतू कोठारी ने बिजली कार्यालय के सामने अनशन शुरू कर दिया।
नगर पालिका से केंद्र तक भाजपा की सत्ता, फिर भी आंदोलन की मजबूरी
इस घटनाक्रम ने भाजपा के 'सुशासन' के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नगर पालिका से लेकर राज्य और केंद्र तक भाजपा की सरकार होने के बावजूद भाजपा समर्थित पार्षद को अपने ही वार्ड की बिजली समस्या के समाधान के लिए अनशन का सहारा लेना पड़ा।
सवाल यह है कि जब एक निर्वाचित पार्षद को अपने वार्डवासियों की मूलभूत समस्या के समाधान के लिए विभागीय कार्यालय के सामने बैठकर आंदोलन करना पड़े, तो आम जनता अपनी समस्याओं के समाधान के लिए आखिर किस दरवाजे पर दस्तक दे?
फिलहाल बिजली विभाग ने नया ट्रांसफार्मर लगाने का आश्वासन दिया है। अब वार्डवासियों की नजर इस बात पर टिकी है कि अनशन के बाद मिला आश्वासन धरातल पर कब उतरता है !

