हेमाबंद गौवंश मौत मामला गरमाया : गौसेवकों ने घेरा कलेक्ट्रेट, कलेक्टर से सीधे जवाब मांगते हुए गेट पर धरना

 “गलत रिपोर्ट बनाने वालों पर कार्रवाई करो” की गूंज—आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, संपत्ति की जांच और बुलडोजर कार्रवाई की मांग; तहसीलदार को लौटाया, कलेक्टर से आमने-सामने बात पर अड़े गौसेवक


बेमेतरा टाइम्स ।
ग्राम हेमाबंद में गौवंशों की कथित बदहाली और मौत का मामला अब सड़क से कलेक्ट्रेट तक पहुंच गया है। मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर सोमवार को बड़ी संख्या में गौसेवकों ने बेमेतरा कलेक्ट्रेट का घेराव कर दिया। आक्रोशित गौसेवक लगातार नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट के सामने धरने पर बैठ गए हैं।

गौसेवकों का आरोप है कि मामले की जांच में गलत रिपोर्ट तैयार करने वाले पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारियों एवं डॉक्टरों पर भी कार्रवाई की जानी चाहिए। उनका कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए।

आरोपी का मुंह काला कर शहर में घुमाने की मांग

प्रदर्शन कर रहे गौसेवकों ने आरोपी के खिलाफ बेहद कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई है। उन्होंने आरोपी का मुंह काला कर शहर में डंडा मारते हुए घुमाने जैसी कार्रवाई की मांग भी प्रशासन के सामने रखी। इसके साथ ही आरोपी द्वारा कथित रूप से अर्जित संपत्ति और कालेधन की जांच कर ऐसी संपत्ति पर बुलडोजर कार्रवाई करने की मांग की जा रही है।

हालांकि, ऐसी किसी भी कार्रवाई का निर्णय कानून और न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप ही हो सकता है।

तहसीलदार समझाने पहुंचे, गौसेवक बोले—कलेक्टर को बुलाइए

मामले को शांत कराने के लिए कलेक्टर की ओर से तहसीलदार अनिरुद्ध मिश्रा प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे और गौसेवकों से चर्चा कर मामले को सुलझाने का प्रयास किया। लेकिन गौसेवक कलेक्टर से ही सीधे बातचीत करने की मांग पर अड़े रहे।

गौसेवकों का कहना है कि मामला बेहद गंभीर है और वे किसी अधिकारी के माध्यम से अपनी बात रखने के बजाय कलेक्टर से आमने-सामने चर्चा कर जवाब चाहते हैं।

कलेक्ट्रेट गेट पर बैठकर जमकर नारेबाजी

कलेक्टर के मौके पर नहीं पहुंचने से नाराज गौसेवकों ने कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट के सामने धरना शुरू कर दिया। इस दौरान लगातार नारेबाजी की जा रही है। प्रदर्शन के चलते कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है।

अब प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती

हेमाबंद में गौवंशों की मौत के मामले में पहले ही प्रशासन से निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग उठ रही थी। अब कलेक्ट्रेट घेराव के बाद प्रशासन के सामने प्रदर्शनकारियों को संतुष्ट करने के साथ-साथ पूरे मामले की पारदर्शी जांच कराने की चुनौती खड़ी हो गई है।

सबसे बड़ा सवाल यही है—यदि जांच में लापरवाही या गलत रिपोर्ट तैयार करने की पुष्टि होती है, तो क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी? और क्या हेमाबंद में गौवंशों की मौत की वास्तविक संख्या और कारणों का सच सामने आएगा?

फिलहाल गौसेवक कलेक्टर के मौके पर पहुंचकर उनसे सीधे चर्चा करने की मांग पर अड़े हुए हैं और कलेक्ट्रेट गेट के सामने धरना जारी है।

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