एक मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा, दूसरी गौशाला की बदहाली ने खोली व्यवस्था की पोल—10 से 15 मृत गौवंश व कंकाल मिलने की आशंका, दुर्गंध से लोगों में आक्रोश
स्थानीय स्तर पर सामने आ रही जानकारी के अनुसार गौशाला में रोजाना दो से चार गौवंशों/ मवेशियो की मौत होने की बात कही जा रही है। आरोप है कि मृत गौवंशों के शवों को नगर पंचायत के ट्रैक्टर के माध्यम से नदी के किनारे स्थित पुरानी मुस्लिम कब्रिस्तान के पास फेंका जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की प्रशासनिक स्तर पर पुष्टि होना अभी बाकी है।
हेमाबंद के बाद दूसरा मामला—आखिर निगरानी कौन कर रहा है?
हेमाबंद में गौवंशों की मौत को लेकर बीते दिनों कलेक्ट्रेट के सामने गौसेवकों ने धरना देकर प्रशासन से जवाब मांगा था। मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि थान खम्हरिया गौशाला की कथित बदहाली सामने आने से जिले में गौवंश संरक्षण और गौशालाओं की निगरानी व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सवाल यह है कि यदि गौशाला में प्रतिदिन पशुओं की मौत हो रही है और शवों के खुले में निस्तारण के आरोप सामने आ रहे हैं, तो संबंधित विभागों की नियमित निगरानी आखिर कहां है?
चारा-पानी के अभाव और कीचड़ से बिगड़ रही हालत?
बताया जा रहा है कि गौशाला में पर्याप्त चारा और उचित रख-रखाव नहीं होने के कारण गौवंशों/ पशुओ की हालत खराब होती जा रही है। लगातार बारिश के कारण गौशाला परिसर में कीचड़ की स्थिति बनने से पशुओं में संक्रमण फैलने और इसके चलते मौत होने की आशंका भी जताई जा रही है।
यदि पशु बीमार हैं तो तत्काल पशु चिकित्सा टीम भेजकर स्वास्थ्य परीक्षण, उपचार और मृत पशुओं का पोस्टमार्टम कराया जाना जरूरी है, ताकि मौत के वास्तविक कारण सामने आ सकें।
नदी किनारे शव फेंकने के आरोप से बढ़ी चिंता
जिस स्थान पर कथित रूप से मृत गौवंशों/ मवेशीयों को फेंके जाने की बात सामने आ रही है, वहां से दुर्गंध उठने की जानकारी है। स्थानीय लोगों के अनुसार मौके पर 10 से 15 मृत गौवंशों के साथ कंकाल भी मिल सकते हैं।
यदि यह बात जांच में सही पाई जाती है तो मृत पशुओं के निस्तारण की व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच जरूरी होगी।
प्रशासन करे तत्काल स्थल निरीक्षण
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन को तत्काल थान खम्हरिया गौशाला का औचक निरीक्षण कराना चाहिए। मौके पर मौजूद सभी गौवंशों की वास्तविक संख्या की गणना, बीमार पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण, मृत गौवंशों की संख्या, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, चारा-पानी की उपलब्धता और गौशाला के रख-रखाव का रिकॉर्ड जांच के दायरे में लिया जाना चाहिए।
साथ ही जिस स्थान पर मृत गौवंशों को फेंके जाने का आरोप है, वहां भी राजस्व, पशु चिकित्सा और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम भेजकर मौके का पंचनामा और आवश्यक जांच कराई जानी चाहिए।
अब सवाल सिर्फ हेमाबंद का नहीं, पूरे जिले की गौशालाओं की निगरानी का है
हेमाबंद मामले में उठे सवालों के बीच थान खम्हरिया से सामने आई यह खबर प्रशासन के लिए एक नई चुनौती बन गई है। यदि जिले की गौशालाओं में वास्तव में गौवंशों की ऐसी स्थिति है, तो केवल एक-दो स्थानों की जांच से काम नहीं चलेगा।
जरूरत अब पूरे जिले की गौशालाओं के औचक निरीक्षण की है। बेजुबान गौवंशों की मौत के बाद जांच शुरू करने के बजाय प्रशासन को यह बताना होगा कि उनकी मौत रोकने के लिए पहले से निगरानी और व्यवस्था आखिर क्यों नहीं की गई?
