झीरम घाटी फैसला : कांग्रेस ने बताया आधा-अधूरा न्याय, पूर्व विधायक आशीष छाबड़ा बोले—अदालत का सम्मान, लेकिन साजिश के सवाल आज भी अनसुलझे


बेमेतरा टाइम्स । झीरम घाटी नरसंहार मामले में एनआईए अदालत के फैसले के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक आशीष छाबड़ा ने फैसले को आधा-अधूरा न्याय बताते हुए कहा कि कांग्रेस न्यायालय का सम्मान करती है, लेकिन झीरम घाटी हमले के पीछे कथित बड़ी साजिश से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब आज भी सामने नहीं आए हैं।

छाबड़ा ने कहा कि न्यायालय ने उन्हीं तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर फैसला सुनाया, जो एनआईए की ओर से अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए गए। उनका आरोप है कि एनआईए की जांच शुरुआत से ही दिशाविहीन रही और वह कथित राजनीतिक षड्यंत्र का पर्दाफाश नहीं कर सकी।

उन्होंने कहा कि एनआईए ने जिन 10 लोगों को गिरफ्तार किया था, उन्हें दोषी पाया गया है। कांग्रेस का दावा है कि ये आरोपी नक्सली संगठन के छोटे कैडर थे और इतनी बड़ी घटना को बिना बड़े नक्सली नेताओं के कथित निर्देश एवं योजना के अंजाम देना संभव नहीं था। छाबड़ा ने यह भी सवाल उठाया कि शुरुआती एफआईआर में जिन बड़े नक्सली नेताओं के नाम शामिल किए गए थे, बाद में वे नाम क्यों हटा दिए गए?

‘फैसले के बाद भी ये सवाल क्यों बाकी?’

पूर्व विधायक ने कई सवाल उठाते हुए कहा—परिवर्तन यात्रा की सुरक्षा हटाने के निर्देश किसने दिए थे? यात्रा का मार्ग किसके निर्देश पर बदला गया? हमले की योजना किसने बनाई थी? बड़े इनामी नक्सलियों के आत्मसमर्पण के समय सरकार द्वारा उन्हें झीरम हमले से जोड़कर किए गए दावों के बावजूद एनआईए ने उनसे पूछताछ क्यों नहीं की?

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि हमले में घायल और जीवित बचे प्रत्यक्षदर्शियों के बयान एनआईए ने क्यों नहीं लिए? घटना के पीड़ितों से पूछताछ क्यों नहीं की गई? कांग्रेस सरकार द्वारा गठित एसआईटी को जांच करने से क्यों रोका गया?

‘साजिश का पर्दाफाश नहीं हुआ तो न्याय कैसे पूरा?’

छाबड़ा ने आरोप लगाया कि इन महत्वपूर्ण सवालों के जवाब अब तक सामने नहीं आए हैं। उन्होंने कहा कि केवल आरोपियों को सजा मिलने से झीरम घाटी की पूरी सच्चाई सामने नहीं आती, बल्कि हमले के पीछे की कथित साजिश, षड्यंत्र और इसके जिम्मेदार लोगों की पहचान भी जरूरी है।

उन्होंने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि तत्कालीन भाजपा सरकार की भूमिका सामने न आए, इसे ध्यान में रखते हुए जांच को कथित रूप से सीमित रखा गया। उन्होंने कहा कि झीरम नरसंहार में मारे गए कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के परिजन आज भी पूरी सच्चाई और न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

कांग्रेस लेगी आगे की रणनीति पर फैसला

आशीष छाबड़ा ने कहा कि एनआईए अदालत के फैसले के बाद कांग्रेस पार्टी विधि विशेषज्ञों से राय लेगी और उसके बाद आगे की कानूनी एवं राजनीतिक रणनीति तय करेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का उद्देश्य किसी न्यायिक संस्था पर सवाल उठाना नहीं, बल्कि झीरम घाटी नरसंहार की पूरी सच्चाई और कथित साजिश का पर्दाफाश सुनिश्चित करना है।

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